भारत के सौंदर्य का शहर : चंडीगढ़ का इतिहास और जानकारी 💞🕉️🚩💞🙏


चंडीगढ़ के मेरे सबसे अच्छे दोस्तों के साथ सुनहरा पल (सुखना झील ) तैजेंडरजी, धीरजजी & नीरजजी (15May 2013) 💞🙏

“चंडीगढ़ शहर को मानव पैमाने पर बनाने की योजना है। यह हमें अनंत ब्रह्मांडों और प्रकृति के संपर्क में रखता है। यह हमें सभी मानवीय गतिविधियों के लिए स्थान और भवन प्रदान करता है जिसके द्वारा नागरिक एक पूर्ण और सामंजस्यपूर्ण जीवन जी सकते हैं। यहां प्रकृति और हृदय की चमक हमारी पहुंच के भीतर है।”
- ले करबुसिएर

चंडीगढ़ का इतिहास और जानकारी :
   "चंडीगढ़", भारत का एक केन्द्र शासित प्रदेश है, जो दो भारतीय राज्यों पंजाब और हरियाणा की राजधानी भी है। यह भारत का पहला सुनियोजित शहर है। इसकी योजना एक फ्रांसीसी वास्तुकार 'ली कार्बुजिए' ने बनाई थी।

चंडीगढ़ के नाम का अर्थ है चंडी का किला। यहाँ 'चंडी माता' का एक प्रसिद्द मन्दिर है जो प्रसिद्द पर्यटन स्थल भी है। उन्हीं के नाम से चंडीगढ़ का नामकरण हुआ है। चंडीगढ़ शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी मे स्थित है इसकी समुद्र तल से ऊंचाई 365 मीटर है।

अधिकांश चंडीगढ़ बरगद और यूकेलिप्टस के बगीचों से भरा हुआ है। अशोक, कैसिया, शहतूत व अन्य वृक्ष भी यहाँ की शोभा बढ़ाते हैं। शहर को घेरे हुए बड़ा वन्य-क्षेत्र है जिसमें अनेक जंतु व पादप प्रजातियां फलती-फूलती हैं। यहाँ की 'सुखना झील' सबसे सुन्दर झीलों मे से एक है यह 3 किलोमीटर लम्बी है और मानव निर्मित है।

चंडीगढ़ के 'रॉक गार्डन' का निर्माण स्व० नेकचन्द ने करवाया था। यह कचरे के प्रयोग से बना है जो पूरे एशिया मे प्रसिद्ध है। 'रोज़ गार्डन' का पूरा नाम जाकिर हुसैन रोज़ गार्डन है। यह एशिया का सबसे बडा पुष्प उद्यान है। यहाँ पर गुलाब के पौधों की हजार से ज्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं।

चंडीगढ़ शहर का प्रशासनिक नियंत्रण भारत सरकार के गृह मंत्रालय के पास है। वर्तमान में पंजाब के राज्यपाल ही चंडीगढ़ के प्रशासक होते हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग चंडीगढ़ आकर बसे हैं, इसलिए यहाँ की संस्कृति और परंपरा में एक मिश्रण दिखता है।

      चंडीगढ़ जैसा अद्भुत शहर भारत में स्थित है। यह शहर किसी भी राज्य का हिस्सा नहीं माना जाता। यह शहर भारत का केंद्र शासित प्रदेश है। इस शहर का नियंत्रण भारत सरकार के हाथों में है। इस शहर पर किसी भी राज्य का अधिकार नहीं। इस शहर की खास बात यह है की यह शहर पंजाब और हरयाणा दोनों राज्य की राजधानी का शहर है लेकिन इसे इन राज्यों में शामिल नहीं किया जाता।


     चंडीगढ़ शहर का इतिहास 8000 साल पुराना है। शुरुवात में इस शहर में दुनिया की सबसे पहली संस्कृति हड़प्पा संस्कृति के लोग रहते थे।

मध्ययुगीन काल में यह शहर बहुत ही समृद्ध था और तब यह शहर पंजाब प्रान्त का हिस्सा था। लेकिन सन 1947 में देश को आजादी मिलने के बाद पंजाब को पश्चिम और पूर्व पंजाब में बाटा गया।

भारत का बटवारा होने के बाद पूर्व पंजाब की कोई भी राजधानी नहीं थी क्यों की उस समय लाहोर शहर पाकिस्तान को दे दिया गया था। इसीलिए पंजाब को राजधानी का शहर देने के लिए चंडीगढ़ को पुरे नियोजन से बनाया गया। इसीलिए सभीने शिवालिक पहाड़ी के बाजु में चंडीगढ़ शहर बनाने का प्लान बनाया था। इसीलिए बहुत ही सक्षम अधिकारीयो को इस शहर को बनाने का दायित्व दिया गया था।

इस शहर की खास बात यह की खुद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भी इस शहर के निर्माण में ध्यान दिया था। मगर इस शहर को बनाते वक्त कई सारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। शहर बनाने के लिए सही जगह ढूँढना बहुत जरुरी था इसीलिए इस काम को करने के लिए एक समिति भी स्थापित की गयी थी।

जगह का चयन करते वक्त वहा का वातावरण, सैन्य भेद्यता, जल की सुविधा आदि बातो को ध्यान में रखा गया था और उसीके मुताबिक ही जगह को चुना गया।

मगर कुछ समय बाद हरियाणा राज्य की भी निर्मीती हुई और पंजाब और हरयाणा दोनों राज्यों को राजधानी का शहर चाहिए था। इस शहर के महत्व और यह शहर दोनों राज्यों के लिए बहुत नजदीक होने की वजह से इसे पंजाब और हरियाणा की राजधानी घोषित कर दिया गया।

इस शहर का नाम यहाँ के चंडी मंदिर के नाम पर रखा गया है, इसीलिए इस शहर को चंडीगढ़ कहा जाता है।

चंडीगढ़ की भाषा :
चंडीगढ़ की अधिकारिक भाषा अंग्रेजी है। यहाँ के अधिकतर लोग हिंदी (67.53%) में बात करते है मगर कुछ लोग पंजाबी (27.89%) भी बोलते है। यहा के सरकारी स्कूल में इंग्लिश, हिंदी और पंजाबी में भी पढाया जाता है।


चंडीगढ़ के मेरे सबसे अच्छे दोस्तों के साथ सुनहरा पल तैजेंडरजी,धीरजजी & नीरजजी 💞🙏

चंडीगढ़ का धर्म :
चंडीगढ़ जैसे बड़े शहर में सभी धर्म के लोग बड़े आनंद से रहते है। यहापर चंडी मंदिर होने की वजह से भी इस शहर को चंडीगढ़ नाम दिया गया। इस शहर के सेक्टर 36 में हिन्दू धर्म का प्रसिद्ध ‘इस्कोन मंदिर’ भी है। सिख धर्मं का ‘नाडा साहिब गुरुद्वारा’ इस मंदिर से काफी नजदीक है। इस गुरुद्वारा के अलावा भी यहापर मनीमाजरा और बुरैल में कई सारी ऐतिहासिक मश्चिद भी है।

चंडीगढ़ की संस्कृति :
यहाँ की संस्कृति बहुत ही आधुनिक है। यहापर अलग अलग तरह की संस्कृति का पालन करने वाले लोग देखने को मिलते है। देश के हर कोने से आये हुए लोग इस चंडीगढ़ शहर में रहते है इसीलिए यहापर सभी संस्कृति का मिश्रण देखने को मिलता है।

यहाँ के लोग हिंदी या फिर पंजाबी बोलते है और कुछ लोग दोनों भी भाषा में बात करते है। यहाँ की कला और संस्कृति काफी समृद्ध है।
चंडीगढ़ के मेरे सबसे अच्छे दोस्तों के साथ सुनहरा पल तैजेंडरजी,धीरजजी & नीरजजी 💞🙏

चंडीगढ़ के त्यौहार :
यहापर हर साल सितम्बर या फिर अक्तूबर में नवरात्री का त्यौहार मनाया जाता है। इस त्यौहार में कई सारी संघटनाये रामलीला का आयोजन करते है। इस तरह से रामलीला की घटनाओ का दिखाने की परंपरा पिछ्ले 50 सालों से चलती आ रही है।

यहाँ के जाकिर हुसैन गुलाब बाग में हर साल फरवरी के महीने में ‘गुलाब त्यौहार’ मनाया जाता है। इस त्यौहार में गुलाब के अलग अलग प्रजाति के फुल दिखाए जाते है।

इस शहर में मानसून के दौरान ‘आम का त्यौहार’ मनाया जाता है। यहा के सुखना झील में अन्य त्यौहार भी मनाये जाते है।
चंडीगढ़ के मेरे सबसे अच्छे दोस्तों के साथ सुनहरा पल तैजेंडरजी,धीरजजी & नीरजजी 💞🙏

चंडीगढ़ का पर्यटन :
शिवालिक पर्वत श्रेणी में होने की वजह से चंडीगढ़ शहर पर्यटन का मुख्य आकर्षण बन चूका है। आज इस शहर में पर्यटन के कई सारे स्थल देखने को मिलते है। निसर्ग प्रेमियों को देखने के लिए यहापर बहुत सारे बाग और झीले है।

यहापर पर्यटन के कई सारे आकर्षण केंद्र है। उसमेसे कुछ निचे दिए गए है:

1) रॉक गार्डन
2 ) सुखना झील
3 ) रोज गार्डन
4 ) सरकारी संग्रहालय और आर्ट गैलरी
5 ) अंतर्राष्ट्रीय गुडिया संग्रहालय
6 ) जापानीज गार्डन
 7 ) म्यूजिकल फाउंटेन
8 ) बटरफ्लाई पार्क
 9 ) बोटैनिकल गार्डन
चंडीगढ़ में कई सारे मंदिरे देखने को मिलते है। यहापर इस्कोन का प्रसिद्ध मंदिर भी है। इस शहर में हिन्दू धर्मं के लोग अधिक मात्रा होने की वजह से भी यहापर बहुत सारे मंदिर देखने को मिलते है। मगर यहापर सिख धर्मं के लोग भी बड़ी संख्या में है। यहापर सिख धर्म के भी कई सारे गुरुद्वारा देखने को मिलते है।

चंडीगढ़ के आसपास के और पर्यटन क्षेत्र :-
चंडीगढ़ एक ऐसा शहर है जो अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है। लम्बी चौड़ी सडको में दौड़ती मंहगी मंहगी गाड़ियाँ इस शहर की पहचान है। इस भागदौड़ वाले शहर से कुछ ही दूर जाकर अगर आप सुकून के पल बिताना चाहते हैं तो आप कई सारे हिल स्टेशनों में जा सकते हैं। चंडीगढ़ से कुछ ही दूर स्थित वो हिल स्टेशन जहाँ जाकर आप मजे कर सकते हैं-

शोधी
ये जगह हिमाचल प्रदेश में स्थित है। चंडीगढ़ शहर से इसकी दूरी महज सौ किलोमीटर है। आप जाकर एक दिन में पिकनिक मनाकर वापिस भी आ सकते हैं। यहाँ पर खूब सारे प्राचीन और एतिहासिक मंदिर हैं जहाँ आप घूम सकते हैं। यह हिमाचल प्रदेश का सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है।

इस हिल स्टेशन में आप वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी और ट्रेकिंग का पूरा मजा ले सकते हैं। परिवार और दोस्तों के साथ आपको इस जगह जरूर जाना चाहिए। यहाँ सालभर लोगो का आना जाना लगा रहता है।

कसौली
यहाँ के बारे में तो आपने सुना भी होगा। एक सुकून वाली जगह जहाँ आप खुद को प्रकृति के बहुत करीब पाते हैं। यह जगह शिमला और कालका के बीच स्थित है। इसकी दूरी चंडीगढ़ से महज लगभग 50 किलोमीटर है और आप 1 से 1.5 घंटे की कार ड्राइव करके इस जगह पर आसानी से पहुच सकते हैं। इस हिल स्टेशन में आप एडवेंचर स्पोर्ट्स का पूरा मजा ले सकते हैं।



इसके साथ ट्रेकिंग का मजा भी आपको मिलेगा। घना जंगल और उसमे रहने वाले जानवरों को देखकर आपका मन खुश हो जाता है। आप यहाँ पर घुड़सवारी & ऊँटसवारी का मजा भी ले सकते हैं। सबसे ख़ास बात यहाँ पर उगते और ढलते सूरज को देखना बहुत आनंददायक होता है। इस जगह जाकर आप खुद को सुकून दे सकते हैं। तो देर किस बात की अगर आप चंडीगढ़ में है तो एक बार जाइए इस जगह।

मोरनी हिल्स
चंडीगढ़ से महज तकरीबन 50 किलोमीटर दूर स्थित एक ऐसी जगह जहाँ पर परिवार के साथ बेहतर वक्त बिताया जा सकता है। यहाँ पर कई सारी चीजे हैं जिन्हें देखा जा सकता है। यह हिल स्टेशन अपनी झीलों के लिए बहुत मशहूर है।

यहाँ पर तीन झीले हैं जिनका नाम टिककर ताल, बड़ा ताल और छोटा ताल है। आप यहाँ बोटिंग का पूरा पूरा मजा ले सकते हैं। इस जगह पर जाकर आपको एक अलग की आनंद की अनुभूति होगी।

बड़ोग
यह शिमला और कालका के बीच स्थित एक छोटा सा टाउन है जो की एक हिल स्टेशन भी कहा जाता है। यहाँ पर स्थित चूर चांदनी चोटी दुनियाभर में फेमश है। आप यहाँ जाकर खूब मजे कर सकते हैं। यह चंडीगढ़ से महज साठ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। चंडीगढ़ से इस जगह तक की रोड ट्रिप भी आपको हमेशा याद रहने वाली है।

यहाँ पर आप ट्रंकिंग और कैम्पिंग का पूरा मजा ले सकते हैं। इसके अलावा इस जगह रेलवे की सबसे बड़ी टनल भी है जहाँ आप खूब मजे करेंगे। हर साल हजारो लोग इस जगह जाते हैं। सबसे बड़ी बात आप एक दिन की छुट्टी में यहाँ जाकर वापिस आ सकते हैं। इस जगह आपको जरूर जाना चहिये।
चंडीगढ़ के मेरे सबसे अच्छे दोस्तों के साथ सुनहरा पल तैजेंडरजी,  धीरजजी & नीरजजी 💞🙏

परवाणु
हिमाचल और हरियाणा के बॉर्डर में ये जगह स्थित है। इसकी दूरी चंडीगढ़ से महज लगभग 45 किलोमीटर है। यह बहुत खूबसूरत हिल स्टेशन है। यहाँ पर स्थित पहाड़ियां और बगीचे आपको अपनी तरफ आकर्षित करते हैं।

अगर आप पहाड़ी खाना खाने के शौक़ीन हैं तो इस जगह से बेहतर आपको कही नहीं मिल सकता है। इसके अलावा आप रोपवे के सहारे पहाड़ो की खूबसूरती पूरी तरह से देख सकते हैं। इसके अलावा आप ट्रैकिंग का पूरा मजा इस जगह ले सकते हैं।

तो चंडीगढ़ जैसे भागदौड़ वाले शहर के पास स्थित ये जगहें अपने आप में अद्भुत हैं। यहाँ पर आप जाकर और उसी दिन छुटियाँ मनाकर वापिस भी आ सकते हैं। सबसे बड़ी बात आपको ये महसूस नहीं होगा की आप पहाड़ो के बीच नहीं हैं। सुकून और शांति वाली जगह जहाँ हमेशा लोग घूमने के लिए आते हैं। ये जगहें चंडीगढ़ से ज्यादा दूर भी नहीं हैं।

यहापर साल भर त्यौहार मनाये जाते है। आम का त्यौहार, नवरात्रि, गुलाब त्यौहार जैसे अनोखे त्यौहार केवल चंडीगढ़ में ही मनाये जाते है। इस शहर में बहुत सारी सुन्दर और बड़ी बड़ी झीले भी देखने को मिलती है। यह शहर पर्यटन के लिए काफी अच्छा है क्यों की यहापर देखने जैसे बहुत सारी चीजे है।

  Rock Garden of Chandigarh has been alluring its visitors since its inception due to its sheer brilliance and beauty. It is no small wonder, and people from far and near visit this place to experience the fantasyland up close and personal. The credit for creating this garden goes to Nek Chand, who gave life to his imagination and fantasy. In fact, the very story of how this Rock Garden was formed is more fascinating than the garden itself.

This beautiful garden was established in 1957. Spread across an area of 40 ac, this garden is also famous for being one of the most eco-friendly gardens in the country, as it is has been built solely by home-waste and other industrial items. Also, the sculptures in this place are being created by using items such as bangles, ceramic pots, tiles, bottles, and electrical waste. It won’t be a exaggeration to state that the brilliantly crafted sculptures in the Rock Garden of Chandigarh are a delight. Apart from these gorgeous sculptures, this spot also boasts of man-made waterfalls. And not just these, there are other facts about this garden that makes it stand out among other wonders of our country.

The Rock Garden of Chandigarh was started as a small activity in the 1950s, which now has hundreds of sculptures made from waste, and discarded materials. Millions of tourists from around the world visit this place every year.

Nek Chand, the founder of Rock Garden, started creating this garden secretly during his spare time in 1957. He used to work as a Road Inspector with the Public Works Department, and spent almost 20 years to create this beautiful place. He started by collecting stones, discarded junk, stones from nearby villages, and gathering them in a small forest patch near Sukhana Lake.
Nek Chand then used his artistic genius to give wings to his passion. He started making sculptures with those discarded materials and gradually turned the barren patch of land into a fantasyland.

You will be surprised to know that people were not aware of this artistic side of Nek Chand as he used to work during the midnight hours, without anyone’s knowledge, and also managed to hide his wonderland and creations from people for more than a decade. Over time, there were more than 2000 sculptures created by him.
However, when his secret was discovered, it was not welcomed by open arms by the authorities. They threatened to demolish the place. But when the public got the opportunity to witness the wonderland, they were taken aback and came in support of Nek Chand. And the rest is history.As the public stood by him, the government was left with no other choice, but to support him and also give him a salary, so that he is able to work in this project full-time. The government also provided him with extra workforce.
The sculptures of Nek Chand have been part of several prestigious exhibitions held around the world. In fact, they have found their way into famous museums across the world.

What started as a small activity by a self-taught artistic genius, now holds a prestigious position as being one of the best heritage sites of Chandigarh.




Love forever My best Friends from Chandigarh 💞🙏

Santoshkumar at 2.03Am.

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